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Story World - Pratyush Aryan

मेरा नाम शिव है, बात मेरे कॉलेज के समय की है जब मैं इंटरमीडिएट पास कर के कॉलेज मे गया। सुबह के 7 बज रहे होंगे तभी अचानक एक आवाज आयी। ये आवाज मेरी माँ के थे,जो मुझे उठने के लिए बोल रही थी। उफ़ इतनी जल्दी सुबह हो गयी या माँ मुझे सोने देना नहीं चाहती। मैं ये सोचने लगा तभी मेरी नजर घड़ी की तरफ गयी ... 7 बजकर 10 मिनट हो गए थे। सुबह की नींद कितनी अच्छी होती है न?? उठने का मन ही नहीं करता। तभी एकाएक ध्यान पिता जी की तरफ गया ... वो अभी घर पर ही होंगे। पिता जी की तरफ ध्यान जाते ही मेरी नींद जैसे गायब ही हो गयी क्यों कि उनको किसी का देर तक सोना अच्छा नहीं लगता था। मन को मार कर उठ गया और माँ के पास जा कर बोला .... माँ कभी तो मुझे अच्छे से सोने दिया करो। माँ हँस पड़ी और बोली ज्यादा सोना सेहत के लिये अच्छा नहीं है बेटा। माँ के मुख पर अपने लिये थोड़ी चिन्ता देख कर मैं हँस पड़ा और बोला माँ आप कितनी भोली हो इतना मत सोचो सब अच्छा होता है। माँ ने मेरी तरफ थोड़ी नाराजगी से देखा और घर के काम में वस्त हो गयी। तभी मुझे ध्यान आया कि आज तो 7 जुलाई है और मुझे एडमिशन के लिये आज वाराणसी जाना है। मेरा घर उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद में है जो वाराणसी से 157 km दूर है। घड़ी में सुबह के 7:20 हो रहे थे और वाराणसी जाने के लिये आखिरी train 8 बजे है। मैंने ये बात माँ को बता दिया, वो मुझ पर गुस्सा होने लगी और बोली तुमको अब याद आ रहा है हद होती है लापरवाही की ... अब जाओ जल्दी तैयार हो जाओ, मैं किसी तरह जल्दी जल्दी तैयार हुआ और घर से वाराणसी के लिए निकल पड़ा। जैसे ही मैं स्टेशन पर पहुँचा ट्रेन चलना शुरू कर चुकी थी। मैं बहुत तेजी से दौड़कर एक बोगी में चढ़ गया साथ - साथ भगवान का शुक्रिया किया। ट्रेन में बहुत भीड़ थी .. मै भी अच्छी जगह देख कर बैठ गया। थोड़ा आराम करने के बाद अपनी एक किताब निकाल कर पढ़ने लगा। कुछ समय बाद एक स्टेशन पर गाड़ी रुकी। ट्रेन रुकते ही और यात्री ट्रेन में आ गए। मैंने देखा एक खूबसूरत लड़की मेरे सामने आ कर बैठी। वो किसी के साथ थी .. शायद वो उसके पिता होंगे। क्या लड़की थी वो ... बिलकुल परी जैसी ... ऐसे लगता था जैसे ऊपर वाले ने बड़ी फुर्सत से उसको बनाया था। शायद मैंने ऐसी ही किसी लड़की का ख्वाब देखा था कभी। मैं उसको देख ही रहा था कि मैंने देखा वो भी मुझे ही देख रही हैं। मै अपनी किताब देखने लगा .. और सोचने लगा कहीँ कुछ गलत न सोचे मेरे बारे में। मैं बीच बीच में सबसे नजरें चुरा के उसको देख रहा था। जब एक दूसरे की नज़र से नज़र मिली तो उसने शर्म से अपनी नज़रे नीचे कर ली। हाय ऐसी अदा पर कौन न मर जाए ... ऐसी मासूमियत, ऐसी मुस्कान कि चाँद भी फीका लग रहा था उसके आगे। उसको देखते ही देखते मैं पता नहीं कहाँ खो गया। सभी love stories फिल्में मुझे याद आने लगे। वैसे तो मैं बहुत ही शर्मीला स्वाभाव का हूँ पर पता नही क्यों आज उससे बात करने को जी चाह रहा था लेकिन हिम्मत नहीं कर पा रहा था कि बात करूँ और साथ में उसके पिता भी थे। खैर यही सब सोचते सोचते वाराणसी स्टेशन आ गया। स्टेशन पर जैसे ही ट्रेन पहुँची, ट्रेन में हलचल मच गयी। सब जल्दी उतरने के चक्कर में इधर - उधर भागने लगेे, इस हड़बड़ी मे वो पता नही कहाँ गुम हो गयी। पता ही नहीं चला। मैंने चारों तरफ नज़र घुमाई लेकिन वो कहीं नहीं दिखी। मै थोड़ा उदास हो गया, न तो उस लड़की का नाम ही पता था और न ही contact number.. खैर उदास मन से मैं कॉलेज की तरफ चलने के लिया तैयार हो गया। स्टेशन से बाहर आकर कॉलेज जाने के लिए ऑटो लिया। उस गुमनाम लड़की के चक्कर में मैं ये भी भूल गया कि आज एड्मिशन का last दिन है। कॉलेज पहुँच कर मैंने एड्मिशन काउंटर से फॉर्म लिया और एक कोने में bench पर बैठकर फॉर्म भरने लगा। मैं फॉर्म fill कर रहा था कि तभी पीछे से एक आवाज आयी excuse me .. आप के पास extra pen होगा क्या .? ये आवाज एक लड़की की थी। मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो हैरान हो गया ... ये तो वही लड़की थी जो मुझे ट्रेन में मिली थी... नीले आँखों वाली ... हाँ ये वही लड़की है उसको देख कर मैं देखता रह गया। तभी उसने फिर पूछा .. आप के पास एक और pen है क्या ... मैं जैसे किसी गहरी नींद से जागा और हड़बड़ी मे बोला हाँ .. हाँ .. है मेरे पास और pen उसकी तरफ बढ़ा दिया। उसने मुस्कुरा कर pen लिया और thanx बोलकर मेरे पास ही बैठकर अपना फॉर्म भरने लगी। मेरे दिल में एक हलचल सी होने लगी। मैंने भगवान का शुक्रिया किया। वो बहुत ही ध्यान से फॉर्म भर रही थी और मैं उसको देखते ही जा रहा था। कितनी अच्छी लग रही थी वो pink सूट में .. पूछो मत बस यही दिल कर रहा था कि उसको देखता ही रहूँ। फिर मैंने अपने आप से कहा ... शिव अब बात नहीं की तो कभी नहीं कर पाओगे। उसके friendly स्वभाव और हँस कर बात करने की वजह से थोड़ी हिम्मत सी आ गयी थी उस दिन मुझमें। कितना पागलपन होता है न इश्क़ में ... मैंने अपने आप से कहा। फिर हिम्मत करके मैंने पूछ ही लिया .... आपका नाम क्या हैं .? वो पहले थोड़ी मुस्कुराई और फिर बोली शिवांगी। उसका नाम सुनते ही मुझे कुछ अपनापन सा लगा ... जैसे बरसों से कोई रिश्ता हो उससे। मैं शिव और वो शिवांगी ... एक इत्तिफ़ाक ही तो था। कितना कोमल कितना सुन्दर, इससे पहले की वो कुछ और बोलती मैंने अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाते हुए बोला ... Hi ... i am Shiv. उसने मुस्कुराते हुए हाथ मिलाया। उसकी smile देख कर अब तो मुझे भी यकीन हो गया कि मन ही मन वो भी मुझसे दोस्ती करना चाहती है या उसको मुझसे बात करना अच्छा लग रहा है। तभी वो बोली शिव चलो अब फॉर्म जमा करना है उसकी बात सुन कर मुझे अहसास हुआ कि मैंने अपना फॉर्म नहीं fill किया है। मैंने कहा ... please 2 minute. मैं भी अपना फॉर्म fill कर लूँ। उसने तो पहले नाराज़गी से मेरी तरफ देखा और मुस्कुराते हुए बोली अच्छा ठीक है और मेरी तरफ देखने लगी। मै भी उसकी तरफ देखने लगा। उसकी आँखों में डूब सा गया था जैसे मैं। फिर वो थोड़ी नाराज़गी से बोली फॉर्म नहीं भरना है क्या?? मैं घबड़ा कर बोला .. हाँ हाँ भरना है और फॉर्म भरने लगा। फिर कुछ समय बाद मैंने कहा ... हम दोनों शायद एक ही ट्रेन से आये हैं ... वो हँसने लगी और बोली हाँ मैंने भी देखा आपको, आप मेरी तरफ बार बार देख रहे थे, उसके इतना बोलते ही मेरे चेहरे का जैसे रंग ही उड़ गया हो। मैंने सोंचा शायद शिवांगी ने मुझे देख लिया था। कुछ देर के बाद मैंने कहा ... आप भी तो मेरी तरफ देख रही थी। वो थोड़ा शर्मा गयी। मैंने अपने आप से कहा ... शायद वो भी वही सोच रही है जो मैं सोच रहा हूँ। मै फॉर्म fill कर चुका था। फिर हम साथ साथ फॉर्म जमा करने के लिये ऑफिस की तरफ चल दिये। जब हम वहाँ पहुचे तो देखा कि लड़को और लड़कियों की अलग अलग लाइन थी। वो लड़कियों की लाइन में चली गयी और मैं लड़कों की लाइन में। मेरे लाइन मे 5, 20 लड़के पहले से लगे हुए थे और उसकी लाइन मे सिर्फ 7, 8 लड़कियां। खैर फॉर्म तो जमा करना ही था। मै लाइन में लगा तो हुआ था लेकिन मेरी नज़र बार बार शिवांगी को देख रही थी। वो भी कभी कभी मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी। उसकी स्माइल देख कर मुझको ये यकीन हो चुका था कि उसके दिल मे भी कुछ न कुछ है नही तो वो ऐसे नही देखती। कुछ न कुछ तो है हमारे बीच। इसी बीच मेरा नंबर आने वाला था और लड़को का शोर भी बहुत होने लगा था। मैं भी जल्दी जल्दी फॉर्म जमा करने लगा। फॉर्म जमा करने के बाद मेरी नज़रे शिवांगी को ढूंढने लगी .. लेकिन शिवांगी अपनी लाइन में नहीं थी। मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई, जैसे कोई बहुत कीमती चीज़ खो गयी हो। नज़रे चारों तरफ उसी को ढूंढ रही थी मगर वो कही नही मिली। मैं फिर ये सोचने लगा शायद अपनी किस्मत में वो नही है। तभी किसी ने अचानक मुझे पीछे से हाथ मारा मैंने मुड़ कर देखा तो वो शिवांगी ही थी, मेरे मुड़ते ही वो बोली मुझे ढूंढ रहे हो ना .? मैंने कुछ जवाब नही दिया और बस मुस्कुराने लगा और बोला मुझे लगा कि आप चली गयी। वो हँसने लगी और बोली आपका pen वापस किये बिना कैसे जा सकती हूँ। मैंने उदास मन से कहा ... तो क्या आप pen वापस करने के लिया रुकी थी .? शिवांगी ने मुस्कुराते हुए कहा नहीं शिव आपको थैंक्स भी तो बोलना था, मैंने नाराजगी से बोला ... तो बोल दिया ना थैंक्स ठीक है फिर जाओ। मेरे ऐसे बोलते ही वो हँसने लगी और वही खड़ी रही। उसकी स्माइल देख कर मैं सब गुस्सा भूल गया और बोला मुझे थैंक्स बोलने का एक और तरीका है। उसने पूछा क्या .? मैंने कहा ... मेरे साथ एक कप कॉफी? वो मेरी तरफ हैरानी भरी नज़रो से देखने लगी ... मैंने एक बार और कहा ... हाँ मेरे साथ एक कप कॉफी? वो अपने घड़ी की तरफ देखते हुए बोली ... अच्छा ठीक है सिर्फ 10 minutes बस ... मैंने कहा हाँ ठीक है ... फिर हम साथ साथ कॉलेज कैंटीन की तरफ चल दिये। कैंटीन पहुँच कर मैंने 2 कॉफी का आर्डर दिया और एक अच्छी जगह देख कर बैठे। अब शिवांगी मुझसे खुल कर बात करने लगी थी। वो अपने बारे मे बता रही थी की वो कहाँ से है घर में उसके कौन कौन है। मैं तो बस उसी को देखे जा रहा था और अपने खयालो में खोया हुआ था। तभी शिवांगी बोली कहाँ ध्यान है आपका ...? मैं बोले जा रही हूँ और आप पता नहीं क्या सोच रहे हो। मेरा ध्यान हटा और लापरवाही से बोला कुछ नही बस ऐसे ही। तब तक कॉफी भी आ गयी थी और हम कॉफी पीने लगे। बातों बातों में उसने बताया कि वो अपने पापा के साथ आयी है और वो लोग गाज़ीपुर के रहने वाले है और वो आगे चल कर चार्ट्ड अकाउंटेंट बनाना चाहती है। अचानक शायद उसको कुछ याद आया वो अपने बैग मैं कुछ ढूंढने लगी ... तभी उसके बैग से 2 pen अचानक नीचे गिरा। उसने जल्दी से उठा कर अपने बैग मे फिर से डाल दिया लेकिन तब तक मैं देख चुका था। मैं सोचने लगा जब शिवांगी के पास pen था तो वो मेरे पास क्यों आयी थी? क्या वो भी मुझे पसंद करने लगी है .? ऐसे ऐसे बहुत सवाल मेरे दिमाग मे चल रहे थे। मैंने शिवांगी की तरफ मुस्कुराते हुए देखा। उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया। उसने अपनी नज़रे झुका ली थी। मैंने कहा .. तो ये बात थी शिवांगी.? उसने मेरी तरफ नहीं देखा, शर्म से वो नीचे की तरफ देख रही थी। मैंने फिर कहा .. कुछ बोलती क्यों नही आप। उसने कहा क्या बोलू मैं और फिर चुप हो गयी। मैंने शिवांगी से पूछा आप भी मुझसे बात करना चाहती थी न .? आपके पास pen था फिर भी मेरे पास आयी ... मतलब आपने मुझे ट्रेन में ही देख लिया था। वो एक दम चुप थी, चेहरा उसका शर्म से लाल हुआ था। वो कुछ नही बोल रही थी। मैं फिर नार्मल हो कर बोला शिवांगी कुछ तो बोलो please ... ऐसे चुप मत रहो। तब उसने कहा .. क्या बोलू .? अब मुझमे हिम्मत आ गयी थी, मैंने शिवांगी से कहा ... क्या आप भी वही सोच रही हो जो मै सोच रहा हूं। लेकिन शिवांगी कुछ नही बोल रही थी .. फिर मैंने बड़े प्यार से पूछा शिवांगी please कुछ बोलो जवाब दो मुझे ये बात जानना बहुत जरूरी है please कुछ तो बोलो। कुछ समय तक चुप रहने के बाद उसने बोला हर बात का जवाब नही होता कुछ बातें खुद ही समझ जानी चाहिये। ये बात मेरे लिये बहुत जरूरी था। उसका ये जवाब बहुत था मेरे दिल के सुकून के लिए। मै भी बहुत खुश था। तभी वो अचानक घड़ी की तरफ देख कर बोली बहुत समय हो गया शिव, पापा इंतज़ार कर रहे होंगे चलो अब, मैंने भी घड़ी देखा और कहा चलो और हम गेट की तरफ चल दिया। मैंने सोचा चलो अब क्लास स्टार्ट होने में कुछ ही दिन है फिर मैं शिवांगी से रोज़ मिलूँगा और बहुत बातें करूँगा कुछ ही दिन तो है। गेट पर पहुचते ही वो अपने पापा के पास गयी कुछ बातें करने के बाद वो ऑटो ले कर स्टेशन की तरफ चल दी और मैं वहीँ से शिवांगी को जाते हुए देख रहा था। वो भी मेरी तरफ देख रही थी। फिर कुछ समय बाद मैंने भी ऑटो लिया और स्टेशन की तरफ चल दिया। घर पहुचने पर मैं बस शिवांगी के बारे मे ही सोचता रहा ... उसका हँस कर बातें करना, उसका मुस्कुराना ... बस यही सब याद आ रहा था। वो 15, 20 दिन घर पर उसी के ख्यालो मै खोया रहा। बस यही सोचता रहा क्या वो भी मेरे लिए ऐसे ही सोच रही होगी। खैर वो भी दिन आ गये जब हमारा कॉलेज का first day था। मैं बहुत जल्दी ही कॉलेज आ गया था और wait कर रहा था कि शिवांगी आएगी जब वो आयेगी तो उससे क्या बात करूँगा। यही सोच रहा था तब तक बहुत लड़के लडकिया आ गये थे। लेकिन मेरी नज़रे तो बस शिवांगी को ढूंढ रही थी ... लेकिन वो कही नही थी। मैंने सोचा हो सकता है वो late हो गयी हो आ जायेगी तब तक क्लास का भी टाइम हो चुका था। फिर मैंने सोचा चलो क्लास चलते हैं वो आएगी तो क्लास मे मिल लूँगा आखिर हम एक ही क्लास में है। क्लास स्टार्ट हो गयी लेकिन शिवांगी नही आयी। कुछ समय और बीता, अब तो 2 बजने वाला था और क्लास भी ख़त्म होने वाला था लेकिन शिवांगी का कही पता नही था। मैं सोचने लगा आख़िर शिवांगी आयी क्यों नही .? मुझे परेशान देख कर साथ के एक दोस्त ने पूछा क्या बात है तुम परेशान क्यों हो. .? कुछ टाइम सोचने के बाद मैंने उसको सब बात बता दिया। वो हँसने लगा मैंने बोला एक तो मैं परेशान हूँ ऊपर से तुम हँस रहे हो। उसने हँसते हुए कहा क्यों परेशान हो रहे हो ... आज first day है आज बहुत से लड़के लड़कियां नही आये है। कल आ जायेगी ज्यादा मत सोचो। उसकी बात सुन कर मुझमे थोड़ी हिम्मत आई और सोंचने लगा हो सकता है उसको कुछ काम आ गया हो इसलिए शिवांगी नही आयी ... कल आ जायगी ये सोच कर मैं कॉलेज से आ गया। अगले दिन फिर मै उसका wait करता रहा कि अब आएगी लेकिन वो नही आयी। ऐसा करते करते 5, 6 दिन हो गये लेकिन शिवांगी का कही पता नही था। अब तो मैं बहुत परेशान रहने लगा कि आखिर शिवांगी आयी क्यों नही। फिर मुझे ध्यान आया की एडमिशन लिस्ट देखता हूँ उसपर उसका नाम होगा। मै भाग कर गया और लिस्ट देखने लगा ... लिस्ट मैं शिवांगी का नाम था। मैं और परेशान होने लगा जब उसका नाम लिस्ट मे है तो वो आयी क्यों नही। वो ठीक तो है न, ऐसे बहुत सारे सवाल मेरे दिमाग मे चल रहे थे और मुझको बहुत परेशान कर रहे थे। ऐसे करते करते पूरे 20 दिन हो गये थे लेकिन शिवांगी कही नही थी। मेरे दिमाग मे बहुत सारे सवाल चल रहे थे कि जब उसने एडमिशन लिया तो वो आयी क्यों नही। कहीँ उसकी तबियत तो नही ख़राब है, वो ठीक तो है न बस यही सोच रहा था। हे भगवान अगर उसको कुछ हुआ है तो उसको ठीक कर दो यही दुआ करने लगा। शिवांगी को मुझसे दूर हुए 2 महीने हो गए। अब मुझे यकीं हो गया था की वो नही आएगी लेकिन मेरे दिल को यकीं था कि वो मिलेगी। बहुत ढूंढा उसको पूरे वाराणसी के कॉलेज मे लेकिन शिवांगी कही नही थी। उसका हँस कर बात करना उसका मुस्कुराना सब याद आ रहा था ... वो आखरी बार उसका मुड़ कर देखना। आज इस बात को 9 साल हो गये लेकिन मैं आज तक शिवांगी से नहीं मिला। भगवान से आज भी यही दुआ है की जहाँ भी हो वो ठीक हो खुश हो बस और कुछ नही चाहिए मुझे। आज भी उसका वो हँस कर बात करना, उसकी कही एक एक बात याद है ...... "मुझको भी ये खबर है, कि तुम नहीं हो, कही नहीं हो, शायद हम कभी न मिले, मगर ये दिल कह रहा है, तुम यहीं हो, यहीं हो, यहीं कहीं हो ....." जीवन में ऐसे ही कभी कभी कुछ अजनबी मिल जाते हैं जो दिल के बहुत करीब आ जाते हैं ... शायद यही रिश्ता था शिव और शिवांगी का .... एक अटूट सा बंधन हो जैसे उनके बीच ... इस शिव को तो आज भी इन्तिज़ार है अपनी उसी शर्मीली सी और चंचल शिवांगी का ....
Story Written By Pratyush Aryan (Pramod Verma) B.Sc. B.Ed. (Math) Teacher, Web Designer & Writer