
आज फिर से वो सारी पुरानी धूल जमीं यादें ताज़ा हो गई। सात साल बीत गए। सच में समय बहुत जल्दी गुज़र जाता है। आज मैंने उसे सात साल बाद बस स्टेशन के बाहर लगे ATM के बाहर खड़े देखा, किसी आदमी के साथ, शायद उसका पति होगा। दिल कह रहा था उसके सामने जाकर खड़ा हो जाऊं, पर क्या फायदा जो मैं सात साल पहले नहीं कह सका, उसे आज कहने का तो कोई मतलब ही नहीं होता। वैसे बहुत कुछ बदला होगा इतने लंबे समय में, लेकिन मैं उसे आज भी पहली नज़र में ही पहचान गया। वो बिल्कुल नहीं बदली है, शायद अब उसकी शादी हो गयी है, जैसा की मुझे उसे देख पता चल पा रहा है। लगभग सात साल पहले ही मैंने उसे अपनी दुकान के आगे पतली सी व्यस्त सड़क से गुज़रते देखा था। जनवरी की ठंडी थी ... सुबह के यही कोई 9:30 का समय हो रहा था, और मैं अपनी छोटी सी मोबाइल शॉप में बगल वाले गुप्ता जी की चाय की पहली चुस्की लेने के लिए कांच के उस ग्लास को होठों से लगाने वाला ही था कि, पहली बार मेरी नज़र उस लड़की पे पड़ी थी। वो अपने हाथों को बांधे चल रही थी। उसके मुँह से आने वाले जाड़े का धुवां और ठण्ड से लाल हो चुकी उसकी नाक उसे खूबसूरत से और ज्यादा खूबसूरत बना रही थी। उस सुबह पहली बार, मैं किसी के प्यार में पड़ना चाहता था, मैं उसका वापस आने तक उसी सड़क पर इंतज़ार करने लगा। वो वापस 10:30 बजे वहां से गुज़री थी, उसके बाद मैं रोज सुबह के 9:30 बजने का इंतज़ार करता और चाहता की जब वो सामने की सड़क से गुज़रे तो, समय वहीँ थम जाए, मैं ये जानता था कि ये सब संभव नहीं। शायद वो कहीं कोचिंग जाती थी, किसकी कोचिंग? ये मुझे नहीं पता था। जब भी उसके आने का समय होता मैं अपनी दुकान के बाहर आ जाया करता। वो 100 मीटर दूर से आ रही होती और मेरी प्यासी निगाहें उस पर टिक जाया करती, जब तक की वो आँखों से ओझल न हो जाए। मेरी इन हरकतों का उसे भी अंदाज़ा हो गया था, तभी एक सुबह उसने मेरे सामने से गुज़र जाने के बाद पलट कर देखा। शायद ये जानने के लिए, या फिर confirm करने के लिए की मैं उसे उसके गुज़र जाने के बाद भी देखा करता हूँ। वो उस रोज पलटी और मेरी चोरी पकड़ी गयी, दिल की धड़कने कुछ देर के लिए थम सी गयी थी और फिर सामान्य से अधिक गति से धड़कने लगी। ये मेरे लिए एक नया सा अहसास था, अजीब सा, पर सुकूनदेह। दूसरे दिन वो अपने ही समय पर मुझे सामने से आते दिखी, उसने उस दिन मेरे सामने से गुजरते समय एक पल को मेरी तरफ गर्दन घुमाई, उस दिन भी मेरी चोरी पकड़ी गयी, मैंने उसके मेरी तरफ देखते ही, उसके ऊपर से अपनी नज़रें चुरा ली, वो मेरे सामने से निकल गयी लेकिन मेरी नज़रें उस दिन उसका पीछा करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई, पता नहीं क्यों? लेकिन उस दिन मुझे उसके वापस कोचिंग से आने का इंतज़ार करना, और दिनों से अधिक बेचैन किए जा रहा था। उसे गए लगभग 15-20 मिनट हुए थे, और मैं अपनी दुकान में आकर बैठ गया था। मैं साढ़े दस बजने का इंतज़ार कर रहा था, और खुद को उसकी नज़रों का सामना करने के लिए तैयार कर रहा था। मैं अपने लैपटॉप पर गाने लगाए सुन रहा था, तभी एक प्यारी सी आवाज ने मुझे मेरे ख्यालों से बाहर निकाला - भैया आईडिया के टॉप-अप है क्या? बीस वाले..? मैंने अपनी नज़रें उठाई और मेरे मुँह से बिना कुछ सोचे समझे खुद ही निकल गया .... please भैया मत बोलो मुझे .... वो आवाज उसी लड़की की थी। मेरे ये कहने के बाद उसके चेहरे पर एक मुस्कान तैर गई। उसने मुस्कुराते हुए पूछा - क्यों? उसका मुस्कुराना ही उसके "क्यों" का जबाब दे रहा था, लेकिन मैं उसके क्यों का जबाब नहीं दे पाया, मैंने बात को काटते हुए कहा - नहीं आईडिया के कूपन नहीं हैं, फ्लैक्सी हो जाएगी। नहीं फ्लेक्सी नहीं करानी ... वो तब भी मुस्कुराते हुए बोली, और ok थैंक्स कहते हुए चली गई ... मैं कुछ बोलना चाह रहा था पर उसे रोक नहीं पाया, शायद मैं सिर्फ उसका नाम जानना चाह रहा था। मैं उसके निकलते ही, उसके पीछे बाहर निकला। मैं उसे मुझ से दूर जाते देख रहा था। उसे यकीन था कि मेरी नज़रें उसका पीछा कर रही हैं। वो कुछ मीटर जाने के बाद पीछे पलटी और उस बार मैंने अपनी नज़रें नहीं चुराई .... मैं उसकी ही आँखों मैं देखता रहा और वो भी मुस्कुरा दी ..... मुझे यकीन हो गया कि मेरा असर उस पर कहीं न कहीं हो ही गया। शायद उस सुबह उसके कोचिंग की किसी कारण जल्दी छुट्टी हो गई थी। बदकिस्मती से उस दिन इस सब के बाद गांव से फ़ोन आया कि घर आ जाओ एक छोटा सा function है, मुझे अपने गॉव जाना पड़ा ... गॉव में ज़रूरी काम की वजह से दो महीनो तक लौट नहीं पाया और जब लौटा तो सब कुछ बदल चुका था। शायद वो क्लासेस जाना छोड़ चुकी थी, और मैंने भी कुछ दिन उसके इंतज़ार में दुकान खोली और फिर हमेशा के लिए बंद करके गांव वापस चला आया, मुझे उससे प्यार हो गया था, लेकिन मुझे उसका नाम तक नहीं पता था। समय के साथ मैं उसे भूल चुका था। अब उसी पुराने शहर में आए मुझे तीन महीने होने को हैं, और आज मैंने उसे 7 साल के बाद फिर से देखा, मैं आज भी उसका नाम नहीं जानता, उसकी शादी हो गयी है, और मुझे अभी भी कोई मिली नहीं ... बस इतनी सी है ये कहानी ....
Story Written By - Pratyush Aryan (Pramod Verma) B.Sc. B.Ed. (Maths) Teacher, Web Designer And Writer