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Story World - Pratyush Aryan

सरजू के कोई माँ बाप रहे होंगे इसमें कोई शक नहीं है, लेकिन अब उसे उनकी शक्ल तक याद नहीं है। 4 - 5 साल का रहा होगा तब से भिखारियों के टोली में पलता आ रहा है। अब वो 11 साल का है पर दिमाग किसी सयाने से भी तेज़। अब उसे लोग भीख कम देते हैं, बोलते हैं कि "बड़ा हो गया है कुछ काम क्यों नहीं करता?" और टोली के सरदार को लगता है कि वो पैसे चुराता है। इन्ही झंझटो से ऊब कर उसने शहर से बाहर एक पीपल के पेड़ के नीचे अपनी अलग दुनिया बसायी है। दिन भर सड़कों पर मांगता फिरता है, फिर शाम को उसी पेड़ के नीचे सो जाता है। कुछ दिन उसे ये दुनिया पसंद आई फिर धीरे - धीरे उसे एक साथी की कमी महसूस होने लगी, एक ऐसा साथी जिससे वो अपने मन की बातें कह सके, उसका मन किसी साथी के लिए तड़पने लगा। एक दिन उसकी मुराद पूरी हो गयी। नाले के किनारे एक कुत्ते का पिल्ला पड़ा हुआ था, सरजू ने उसे उठा कर देखा .... हाय! कितना सुन्दर है ये तो! उसकी ख़ुशी का ठिकाना न रहा। फ़टे कुर्ते में उसे छिपा कर अपने स्थान की तरफ दौड़ा। अब तो उसकी ज़िंदगी का नया अध्याय शुरू हो गया था। उसकी ज़िंदगी में अब कोई आभाव नहीं था। उसे साथी जो मिल गया था। टॉमी अपनी पूँछ हिला कर अपने प्रिय साथी के सामने आ खड़ा हुआ। सरजू उसके शरीर पर हाथ फेर कर बोला "कहाँ भाग गया था? मैं तेरे लिए रोटियाँ मांग कर लाया, और तू पता नहीं कहाँ मारा - मारा फिर रहा है?" …… बदमाश हाथ क्यों चाटता है? काटेगा क्या …? वह पशु अपने साथी को पाकर खिल उठा था, उसकी चमकती आँखे बता रही थी कि वो खुश है ... बहुत खुश। सरजू ने एक टाट का टुकड़ा बिछाते हुए कहा "आ आ सो जाते हैं, बहुत थक गया हूँ रे" और वो दोनों साथी आपस में लिपट कर लेट गए। आसमान में तारे फैले हुए थे, पीपल के पेड़ के नीचे लेटा सरजू उन्ही तारो को देख रहा था, कुछ गुत्थियों में वो उलझा हुआ था, रह - रह कर बोल उठता ... "क्या रे टॉमी तूने दुकान के मालिक को देखा है?" कैसी लाल - लाल आँखे है उसकी, माँगने जाता हूँ तो इस तरह देखता है मानो कच्चा खा जायेगा, कहता है भाग जा नहीं तो बूट से पसली तोड़ दूँगा, मैं उसका क्या ले लेता हूँ? कभी एक चीज़ भी दी है? खाने वाले बाबुओं का बचा जूठा ही मिलता है, टॉमी जब हम भी बड़े हो जायेंगे तो खूब कमायेंगे, और भर पेट खाएंगे। कुत्ते ने अपनी आवाज कुछ इस तरह निकाली मानों वो भी सरजू की बात से सहमत हो और उसका मन भी दुकान के मालिक से बदला लेना चाहता हो। दिसंबर के दिन थे 2 दिन से बारिश बंद नही हुयी थी, सरजू और टॉमी पेड़ के नीचे बैठे काँप रहे थे। सरजू ने बोला "अब तो माँगने जाना ही पड़ेगा, हमने कल से कुछ नही खाया है, तू यहीं बैठ मैं जाता हूँ, तू कहाँ मेरे साथ मारा - मारा फिरेगा और जब तू साथ होता है तो कोई कुछ देता भी नहीं है।" सरजू निकल पड़ा ...... पूरे दिन वो शहर में घूमता रहा। अपने फटे कुर्ते पर वो बारिश और ठंड झेलता रहा, जहां भी कुछ मिल सकता था वो हर उस जगह गया। लेकिन हर जगह उसे दुत्कार ही मिली। शाम को वो थके कदमो से वापस लौटा। टॉमी उसे देखते ही ख़ुशी से पूंछ हिलाने लगा। लेकिन सरजू का भूखा और निराश चेहरा बहुत कुछ कह रहा था। पूरी रात बारिश होती रही और दोनों "साथी" एक दूसरे से लिपट कर ज़िंदगी की जंग लड़ते रहे। फिर सुबह भी हो गयी। न बारिश कम हुयी और न ठंड, सरजू की आँखे लाल हो गयी थी, पूरा बदन अकड़ सा गया था। उसने धीमी आवाज में टॉमी से बोला "तू क्यों परेशान हो रहा है मेरे साथ, जा कुछ ढूढ़ कर खा ले" लेकिन वो वहीं खड़ा रहा, सरजू ने उसके शरीर को प्यार से सहलाया, पता नहीं क्या सोंच कर टॉमी तेजी से शहर की ओर भाग गया। शाम अब रात में बदलने लगी थी, टॉमी ख़ुशी से अपने साथी के पास भागता हुआ आया। उसके मुंह में उसकी कई घंटो की कमाई एक जली रोटी थी। टॉमी ने प्यार से सरजू के बदन को रगड़ा, लेकिन सरजू ने कोई हरकत नहीं की, टॉमी ने उसे उठाने की बहुत देर तक कोशिश की, पर सरजू खामोश था, पता नहीं उसके पशु मन में क्या आया वो धीमे - धीमे शिथिल होने लगा। अगली सुबह लोगों ने देखा, एक इंसान और कुत्ते का बच्चा आपस में लिपट कर एक ऐसी नींद में सो गए थे जिस से उन्हें कोई नहीं उठा सकता था और उनके बलग में एक रोटी का टुकड़ा पड़ा था, जिस पर कुत्ते के दांतो के निशान थे ....
बस इतनी सी है ये कहानी .....
Story Written By - Pratyush Aryan (Pramod Verma) B.Sc. B.Ed. (Maths) Teacher, Web Designer And Writer